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बैंक समाधान विवरण (Bank Reconciliation Statement): कैश बुक और पास बुक का अंतर, BRS कैसे बनाएं उदाहरण सहित

बैंक समाधान विवरण Bank Reconciliation Statement में कैश बुक और पास बुक के अंतर और हल उदाहरणों का थंबनेल

रमेश की किराने की दुकान है। महीने के आखिर में उसने अपनी कैश बुक देखी तो बैंक में ₹50,000 बचे दिख रहे थे। लेकिन जब बैंक से पासबुक (खाते का विवरण) निकलवाई, तो उसमें ₹51,900 लिखे थे। रमेश घबरा गया: "क्या मुझसे हिसाब में गलती हो गई? या बैंक से?" असल में दोनों में से किसी की गलती जरूरी नहीं है। इस अंतर के पीछे कुछ सीधे और साधारण कारण होते हैं, और उन्हें खोजकर दोनों बैलेंस को मिलाने की प्रक्रिया ही बैंक समाधान विवरण (Bank Reconciliation Statement, BRS) कहलाती है। इस अध्याय में हम इसे धीरे-धीरे, उदाहरणों के साथ समझेंगे।

1. कैश बुक और पास बुक क्या हैं?

कैश बुक (Cash Book) व्यापारी खुद अपनी बहियों में रखता है। इसमें नकद और बैंक के सभी लेन-देन लिखे जाते हैं। इसके बैंक कॉलम में दिखने वाला शेष बताता है कि व्यापारी के हिसाब से बैंक में कितना पैसा है।

पास बुक (Pass Book) बैंक की तरफ से ग्राहक को मिलने वाला उसके खाते का विवरण है, जिसे आजकल बैंक स्टेटमेंट भी कहते हैं। इसका शेष बताता है कि बैंक के हिसाब से ग्राहक के खाते में कितना पैसा है।

यहां एक दिलचस्प बात है। एक ही लेन-देन दोनों बहियों में उल्टा दिखता है। जब आप बैंक में पैसा जमा करते हैं, तो व्यापारी के लिए बैंक एक संपत्ति बन जाता है, इसलिए कैश बुक के बैंक कॉलम में यह डेबिट होता है। लेकिन बैंक के लिए यह ग्राहक को लौटाई जाने वाली रकम (दायित्व) है, इसलिए पासबुक में वही जमा क्रेडिट दिखता है। इसी वजह से:

  • कैश बुक में बैंक का अनुकूल शेष (Favourable Balance) यानी जमा राशि डेबिट शेष होती है।
  • पासबुक में वही जमा राशि क्रेडिट शेष दिखती है।
  • बैंक अधिविकर्ष (Overdraft) होने पर ये दोनों उल्टे हो जाते हैं।

2. दोनों के शेष में अंतर क्यों आता है?

अगर हर लेन-देन उसी दिन दोनों जगह लिख लिया जाए तो दोनों शेष हमेशा बराबर रहेंगे। लेकिन असल में कुछ लेन-देन एक जगह पहले और दूसरी जगह बाद में दर्ज होते हैं। अंतर के कारणों को दो समूहों में समझना सबसे आसान है।

(क) वे कारण जिनमें व्यापारी पहले लिख लेता है और बैंक बाद में

जारी किए गए पर अभी तक प्रस्तुत न हुए चेक (Cheques issued but not yet presented): आपने किसी सप्लायर को ₹8,000 का चेक दे दिया और कैश बुक में उसी दिन लिख लिया। पर सप्लायर ने चेक बैंक में अभी डाला ही नहीं। इसलिए बैंक ने आपके खाते से पैसा अभी काटा नहीं। नतीजा: कैश बुक का शेष कम, पासबुक का शेष ज्यादा।

जमा किए गए पर अभी वसूल न हुए चेक (Cheques deposited but not yet collected): आपने ग्राहक से मिला ₹12,000 का चेक बैंक में जमा किया और कैश बुक में लिख लिया। पर चेक क्लियर होने में समय लगता है, इसलिए बैंक ने खाते में पैसा अभी जोड़ा नहीं। नतीजा: कैश बुक का शेष ज्यादा, पासबुक का शेष कम।

(ख) वे कारण जिनमें बैंक पहले लिख लेता है और व्यापारी को बाद में पता चलता है

ग्राहक द्वारा सीधे बैंक में जमा: किसी ग्राहक ने आपके खाते में सीधे ₹5,000 ट्रांसफर कर दिए। बैंक ने पासबुक में जमा लिख दिया, पर आपको सूचना बाद में मिली।

बैंक द्वारा जमा किया गया ब्याज या लाभांश: बैंक कभी-कभी आपके खाते में ब्याज जोड़ देता है या आपकी तरफ से लाभांश वसूल कर लेता है। आपको यह स्टेटमेंट देखकर ही पता चलता है।

बैंक शुल्क (Bank Charges): बैंक सेवा शुल्क काट लेता है और आपको स्टेटमेंट से मालूम होता है।

बैंक द्वारा सीधा भुगतान: आपके स्थायी निर्देश (Standing Instruction) पर बैंक बीमा किस्त, EMI या बिजली बिल अपने आप चुका देता है।

चेक का अनादर (Dishonour of Cheque): आपने ग्राहक का चेक जमा किया, पर ग्राहक के खाते में पैसा न होने से चेक वापस आ गया। बैंक ने आपके खाते से वह राशि घटा दी।

3. बैंक समाधान विवरण (BRS) क्या है?

किसी निश्चित तारीख पर कैश बुक के बैंक शेष और पासबुक के शेष के अंतर के कारण ढूंढकर दोनों को मिलाने के लिए जो विवरण बनाया जाता है, उसे बैंक समाधान विवरण कहते हैं।

ध्यान रखिए कि BRS लेखा बहियों का हिस्सा नहीं है। यह एक विवरण (Statement) है, कोई खाता नहीं है। यह सिर्फ जांच के लिए बनाया जाता है। इसका फायदा यह है कि इससे गलतियां पकड़ में आती हैं, बैंक की गड़बड़ी या धोखाधड़ी का पता चलता है और यह साफ रहता है कि सच में कितनी रकम उपलब्ध है।

4. जोड़ना है या घटाना है? इसका तर्क समझिए

BRS में सबसे ज्यादा गलती इसी बात पर होती है कि कौन सी मद जोड़ें और कौन सी घटाएं। रटने के बजाय सिर्फ एक सवाल पूछिए: "जो मद मेरे शेष में अभी दर्ज नहीं है, उसे जोड़ने के बाद मेरा शेष सामने वाली बही के शेष के बराबर होगा या नहीं?"

मान लीजिए आप कैश बुक के शेष से शुरू कर रहे हैं और पासबुक का शेष निकालना चाहते हैं। चेक जारी हुआ पर बैंक में नहीं लगा, यानी बैंक ने पैसा काटा नहीं है। तो पासबुक में पैसा ज्यादा दिखेगा, इसलिए कैश बुक के शेष में चेक की राशि जोड़नी पड़ेगी। इसी तर्क से बाकी मदें तय होती हैं।

मदकैश बुक के शेष से शुरू करेंपासबुक के शेष से शुरू करें
जारी किए पर प्रस्तुत न हुए चेकजोड़ेंघटाएं
जमा किए पर वसूल न हुए चेकघटाएंजोड़ें
ग्राहक द्वारा सीधे जमा / बैंक द्वारा जमा ब्याज या लाभांशजोड़ेंघटाएं
बैंक शुल्क / बैंक द्वारा सीधा भुगतान / चेक का अनादरघटाएंजोड़ें

ध्यान दीजिए कि पासबुक से शुरू करने पर सब कुछ उल्टा हो जाता है। इसलिए एक बार तालिका याद करने के बजाय ऊपर का तर्क समझ लेंगे तो कभी नहीं भूलेंगे।

बैंक अधिविकर्ष होने पर: अगर कैश बुक में बैंक का शेष अधिविकर्ष (Overdraft) है, तो ऊपर की तालिका के सारे जोड़ने और घटाने उल्टे हो जाते हैं। इसे उदाहरण 3 में देखेंगे।

5. BRS बनाने के आसान चरण

चरण 1: सबसे पहले देखिए कि प्रश्न में कौन सा शेष दिया है: कैश बुक का या पासबुक का। इसी से तय होगा कि आप कहां से शुरू करेंगे।

चरण 2: यह भी देखिए कि शेष अनुकूल है या अधिविकर्ष है। अनुकूल हो तो ऊपर की तालिका जैसी चलेगी, अधिविकर्ष हो तो उल्टी।

चरण 3: अब दी गई हर मद को पढ़कर तय कीजिए कि वह किस समूह की है: चेक से जुड़ी या बैंक द्वारा सीधे की गई। फिर तालिका के अनुसार जोड़िए या घटाइए।

चरण 4: अंत में जो शेष आए, वह सामने वाली बही का शेष होगा। इसे हम BRS के अंत में लिखते हैं।

6. उदाहरण 1: कैश बुक के शेष से पासबुक का शेष निकालना

प्रश्न: 31 मार्च 2026 को रमेश की कैश बुक के बैंक कॉलम में शेष ₹50,000 (डेबिट) है। जांच में पता चला:

  1. ₹8,000 के चेक जारी हुए, जो अभी बैंक में प्रस्तुत नहीं हुए।
  2. ₹12,000 के चेक जमा किए गए, जो अभी वसूल नहीं हुए।
  3. बैंक ने ₹300 शुल्क काटा, जो कैश बुक में दर्ज नहीं है।
  4. बैंक ने ₹1,200 ब्याज जमा किया, जो कैश बुक में दर्ज नहीं है।
  5. एक ग्राहक ने सीधे ₹5,000 बैंक में जमा कर दिए, जो कैश बुक में दर्ज नहीं है।

सोचिए: हम कैश बुक के शेष से शुरू कर रहे हैं। चेक जारी हुए पर प्रस्तुत नहीं हुए, यानी बैंक ने पैसा काटा नहीं, तो जोड़ेंगे। वसूल न हुए चेक पर बैंक ने जमा नहीं किया, तो घटाएंगे। बैंक शुल्क बैंक ने काटा पर हमारे पास दर्ज नहीं, तो घटाएंगे। ब्याज और सीधा जमा बैंक ने जोड़ा पर हमारे पास दर्ज नहीं, तो जोड़ेंगे।

31 मार्च 2026 का बैंक समाधान विवरण
विवरणराशि (₹)राशि (₹)
कैश बुक के अनुसार शेष (डेबिट)50,000
जोड़ें:
जारी किए पर प्रस्तुत न हुए चेक8,000
बैंक द्वारा जमा किया ब्याज1,200
ग्राहक द्वारा सीधे जमा5,00014,200
64,200
घटाएं:
जमा किए पर वसूल न हुए चेक12,000
बैंक शुल्क30012,300
पासबुक के अनुसार शेष (क्रेडिट)51,900

रमेश के सवाल का जवाब यही था: ₹50,000 और ₹51,900 का अंतर किसी गलती से नहीं, बल्कि इन पांच मदों से आया था।

जांच करने का तरीका: पासबुक के ₹51,900 से उल्टा चलकर देखिए। चेक जारी (घटाएं) 8,000 → 43,900; चेक वसूल न हुए (जोड़ें) 12,000 → 55,900; ब्याज (घटाएं) 1,200 → 54,700; सीधा जमा (घटाएं) 5,000 → 49,700; शुल्क (जोड़ें) 300 → 50,000। वापस कैश बुक का शेष मिल गया, यानी हल सही है।

एक और तरीका: पहले कैश बुक को सुधार लें

कई किताबों में पहले उन मदों से कैश बुक का शेष सुधारा जाता है जो बैंक ने पहले दर्ज कीं। ब्याज (+1,200), सीधा जमा (+5,000) और शुल्क (−300) जोड़-घटाकर सुधारा हुआ कैश बुक शेष = 50,000 + 1,200 + 5,000 − 300 = ₹55,900 मिलता है। फिर सिर्फ चेक वाली दो मदें बचती हैं: 55,900 + 8,000 − 12,000 = ₹51,900। दोनों तरीकों से उत्तर समान आता है।

7. उदाहरण 2: पासबुक के शेष से कैश बुक का शेष निकालना

प्रश्न: 31 मार्च 2026 को पासबुक के अनुसार शेष ₹32,500 (क्रेडिट) है। जांच में पता चला:

  1. ₹6,000 के चेक जारी हुए पर अभी प्रस्तुत नहीं हुए।
  2. ₹9,000 के चेक जमा हुए पर अभी वसूल नहीं हुए।
  3. बैंक ने ₹2,000 का लाभांश वसूल करके जमा कर दिया, कैश बुक में दर्ज नहीं है।
  4. बैंक ने ₹150 शुल्क काटा, कैश बुक में दर्ज नहीं है।

सोचिए: इस बार हम पासबुक से शुरू कर रहे हैं, इसलिए सब कुछ उल्टा चलेगा। जारी चेक (पासबुक में अभी नहीं कटे) घटाएंगे। वसूल न हुए चेक जोड़ेंगे। लाभांश बैंक ने जमा किया पर कैश बुक में नहीं है, तो पासबुक से घटाएंगे। बैंक शुल्क बैंक ने काटा पर कैश बुक में नहीं है, तो पासबुक में जोड़ेंगे।

31 मार्च 2026 का बैंक समाधान विवरण
विवरणराशि (₹)राशि (₹)
पासबुक के अनुसार शेष (क्रेडिट)32,500
घटाएं:
जारी किए पर प्रस्तुत न हुए चेक6,000
बैंक द्वारा वसूल किया लाभांश2,0008,000
24,500
जोड़ें:
जमा किए पर वसूल न हुए चेक9,000
बैंक शुल्क1509,150
कैश बुक के अनुसार शेष (डेबिट)33,650

जांच: कैश बुक के ₹33,650 से शुरू करके पासबुक तक जाइए। चेक जारी जोड़ें 6,000 → 39,650; वसूल न हुए घटाएं 9,000 → 30,650; लाभांश जोड़ें 2,000 → 32,650; शुल्क घटाएं 150 → 32,500। वही पासबुक का शेष आया।

8. उदाहरण 3: जब कैश बुक में बैंक अधिविकर्ष हो

बैंक अधिविकर्ष वह स्थिति है जब आप खाते में जितना पैसा है उससे ज्यादा निकाल चुके हों, यानी बैंक का पैसा आपके ऊपर बकाया हो। इसमें कैश बुक का बैंक शेष क्रेडिट और पासबुक का शेष डेबिट होता है।

प्रश्न: 31 मार्च 2026 को कैश बुक के अनुसार बैंक अधिविकर्ष ₹20,000 है। ₹5,000 के चेक जारी हुए पर प्रस्तुत नहीं हुए और ₹8,000 के चेक जमा हुए पर वसूल नहीं हुए। पासबुक के अनुसार अधिविकर्ष निकालिए।

सोचिए: कैश बुक में बैंक का शेष −₹20,000 माना जा सकता है। जारी चेक बैंक में नहीं लगे, यानी बैंक ने ₹5,000 कम काटे हैं, तो बैंक का अधिविकर्ष हमारे हिसाब से कम होगा। वसूल न हुए चेक बैंक ने जमा नहीं किए, यानी बैंक के हिसाब से ₹8,000 कम जमा हैं, तो अधिविकर्ष ज्यादा होगा।

31 मार्च 2026 का बैंक समाधान विवरण
विवरणराशि (₹)
कैश बुक के अनुसार अधिविकर्ष20,000
घटाएं: जारी किए पर प्रस्तुत न हुए चेक(5,000)
15,000
जोड़ें: जमा किए पर वसूल न हुए चेक8,000
पासबुक के अनुसार अधिविकर्ष23,000

जांच: कैश बुक का शेष −20,000, जारी चेक जोड़ने पर −15,000 और वसूल न हुए चेक घटाने पर −23,000 आता है, यानी ₹23,000 का अधिविकर्ष, जो ऊपर के उत्तर के बराबर है।

9. परीक्षा में ध्यान रखने योग्य बातें

सबसे पहले शुरुआती शेष पहचानें। प्रश्न में अक्सर "कैश बुक के अनुसार शेष" या "पासबुक के अनुसार शेष" लिखा होता है। जो शेष दिया हो, उसी से शुरू कीजिए और अंत में दूसरी बही का शेष निकालिए।

"अधिविकर्ष" शब्द को पढ़कर ही आगे बढ़ें। अगर यह शब्द आए तो सारे जोड़ने-घटाने उल्टे हो जाएंगे, इसलिए इसे अनदेखा न करें।

सभी चेक एक जैसे नहीं होते। जारी किया हुआ चेक पैसा देने के लिए होता है और जमा किया हुआ चेक पैसा लेने के लिए। दोनों का असर उल्टा होता है, इसलिए इन्हें अलग-अलग पहचानिए।

BRS खाता नहीं है। यह एक विवरण है और इसमें जर्नल प्रविष्टि नहीं होती। हां, अगर ब्याज, शुल्क या अनादर जैसी मदें कैश बुक में दर्ज नहीं थीं, तो उन्हें कैश बुक में दर्ज करना पड़ता है, ताकि कैश बुक भी सही रहे।

जांच जरूर करें। उत्तर आने के बाद उल्टा चलकर देख लीजिए। अगर शुरुआती शेष वापस मिल जाए तो आपका हल पक्का सही है।

10. इस अध्याय का सार

कैश बुक और पासबुक का शेष अक्सर अलग इसलिए होता है क्योंकि कुछ लेन-देन एक जगह पहले दर्ज होते हैं और दूसरी जगह बाद में। इस अंतर के कारण खोजकर दोनों शेष मिलाने की प्रक्रिया ही BRS है। जोड़ने-घटाने के लिए एक ही सोच काफी है: "जो मद सामने वाली बही में अलग तरह से दर्ज है, उसे अपने शेष में जोड़-घटाकर बराबर कर दो।" अनुकूल शेष हो तो एक तरह से चलें, अधिविकर्ष हो तो उल्टा चलें। शुरू के कुछ उदाहरण खुद कॉपी में हल करने के बाद यह टॉपिक बहुत आसान लगने लगेगा।


रोजाना ऐसे ही आसान भाषा के अध्याय और नोट्स के लिए ExamKosh पढ़ते रहिए।

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