अब तक हमने लेखांकन के दो बड़े कदम सीखे: पहले Journal में लेनदेन की एंट्री लिखना और फिर उन्हें Ledger में खाता-वार छाँटना। अब तीसरा कदम आता है, यानी सारे ledger खातों के balance एक सूची में लिखकर यह जाँचना कि हमारा काम सही है या नहीं। इस सूची का नाम है Trial Balance (तलपट)। इस लेख में हम इसे शुरू से आसान भाषा में, उदाहरणों के साथ समझेंगे।
Trial Balance क्या है?
Trial Balance एक ऐसा विवरण (statement) है जिसमें किसी निश्चित तारीख को सभी ledger खातों के डेबिट और क्रेडिट balance एक साथ लिखे जाते हैं। इसके बाद दोनों कॉलम का कुल जोड़ निकाला जाता है।
दोहरी प्रविष्टि प्रणाली में हर लेनदेन का डेबिट और क्रेडिट बराबर होता है। इसलिए अगर सारी एंट्री और ledger सही बने हों, तो Trial Balance के डेबिट और क्रेडिट कॉलम का कुल बराबर आना चाहिए। यही इसका मूल विचार है।
एक बात ध्यान रखें कि Trial Balance कोई खाता (account) नहीं है। यह सिर्फ एक सूची या विवरण है, जो जाँच के लिए बनाई जाती है।
Trial Balance क्यों बनाते हैं?
- गणित की शुद्धता जाँचना: यह पता चलता है कि डेबिट और क्रेडिट का कुल बराबर है या नहीं।
- गलतियाँ पकड़ना: कुल बराबर न आए तो साफ़ हो जाता है कि कहीं गड़बड़ी हुई है।
- सभी खातों के balance एक जगह देखना: पूरे कारोबार की स्थिति एक नज़र में दिख जाती है।
- अंतिम खाते बनाने का आधार: Trading Account, Profit & Loss Account और Balance Sheet इसी की मदद से तैयार किए जाते हैं।
Trial Balance का प्रारूप
| ...... का Trial Balance (.... तारीख को) | |||
|---|---|---|---|
| क्र. | खाते का नाम | डेबिट बैलेंस (₹) | क्रेडिट बैलेंस (₹) |
| 1 | ...... | .... | |
| 2 | ...... | .... | |
| कुल | .... | .... | |
कौन-सा खाता किस कॉलम में जाएगा?
यह Trial Balance का सबसे ज़रूरी हिस्सा है। नियम सीधा है: जिस खाते का balance डेबिट है वह डेबिट कॉलम में जाएगा, और जिसका क्रेडिट है वह क्रेडिट कॉलम में।
| डेबिट कॉलम में | क्रेडिट कॉलम में |
|---|---|
| नकद (Cash) और बैंक शेष संपत्तियाँ (भवन, मशीन, फर्नीचर) देनदार (Debtors) माल की खरीद (Purchases) सभी खर्चे और हानियाँ (वेतन, किराया आदि) आहरण (Drawings) प्रारंभिक स्टॉक (Opening Stock) विक्रय वापसी (Sales Return) | पूँजी (Capital) लेनदार (Creditors) ऋण और अन्य दायित्व (Loan) माल की बिक्री (Sales) सभी आय और लाभ (कमीशन प्राप्त, ब्याज प्राप्त) क्रय वापसी (Purchase Return) बैंक ओवरड्राफ्ट |
याद रखने की ट्रिक: खर्चे और संपत्तियाँ डेबिट में, आय और दायित्व क्रेडिट में। पिछले लेख की DEAL (डेबिट) और CLIG (क्रेडिट) ट्रिक यहाँ भी काम आती है।
Trial Balance बनाने के तरीके
1. Balance Method (शेष विधि)
इसमें हर ledger खाते का सिर्फ शेष (balance) लिखा जाता है। यही सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाली और परीक्षा में पूछी जाने वाली विधि है।
2. Total Method (योग विधि)
इसमें हर खाते के डेबिट और क्रेडिट दोनों पक्षों के कुल योग अलग-अलग लिखे जाते हैं। इसमें balance निकालने की ज़रूरत नहीं पड़ती, पर सूची लंबी हो जाती है।
इस लेख में हम आगे Balance Method से ही काम करेंगे।
Trial Balance बनाने के कदम
- सभी ledger खातों का योग निकालकर उनके balance निकालें।
- हर खाते का नाम और उसका balance एक सूची में लिखें।
- जिन खातों का डेबिट balance है, उन्हें डेबिट कॉलम में लिखें।
- जिन खातों का क्रेडिट balance है, उन्हें क्रेडिट कॉलम में लिखें।
- दोनों कॉलम का कुल जोड़ निकालें और मिलाएँ।
उदाहरण 1: पिछले लेख के ledger से Trial Balance
पिछले लेख में हमने श्री राहुल के लेनदेन से ledger बनाए थे। उन खातों के balance ये थे: Cash ₹88,000 (डेबिट), Capital ₹1,00,000 (क्रेडिट), Purchases ₹50,000 (डेबिट), Suresh ₹10,000 (क्रेडिट), Mohan ₹10,000 (डेबिट), Sales ₹43,000 (क्रेडिट) और Rent ₹5,000 (डेबिट)।
| श्री राहुल का Trial Balance | |||
|---|---|---|---|
| क्र. | खाते का नाम | डेबिट (₹) | क्रेडिट (₹) |
| 1 | Cash A/c | 88,000 | |
| 2 | Capital A/c | 1,00,000 | |
| 3 | Purchases A/c | 50,000 | |
| 4 | Suresh A/c (लेनदार) | 10,000 | |
| 5 | Mohan A/c (देनदार) | 10,000 | |
| 6 | Sales A/c | 43,000 | |
| 7 | Rent A/c | 5,000 | |
| कुल | 1,53,000 | 1,53,000 | |
दोनों कुल बराबर हैं। इसका मतलब है कि जर्नल और ledger का गणित सही रहा।
उदाहरण 2: खातों के शेष दिए हों, तब Trial Balance
परीक्षा में अक्सर सीधे खातों के शेष दे दिए जाते हैं और Trial Balance बनाने को कहा जाता है। मान लीजिए श्री मोहित की पुस्तकों से ये शेष मिले हैं:
पूँजी ₹2,00,000, नकद ₹45,000, फर्नीचर ₹60,000, मशीनरी ₹1,20,000, खरीद ₹1,10,000, बिक्री ₹1,85,000, देनदार ₹40,000, लेनदार ₹35,000, वेतन ₹24,000, किराया ₹12,000, आहरण ₹15,000, कमीशन प्राप्त ₹6,000।
पहले हर खाते को पहचानें कि वह किस प्रकार का है, फिर उसका कॉलम तय करें:
| श्री मोहित का Trial Balance | |||
|---|---|---|---|
| क्र. | खाते का नाम | डेबिट (₹) | क्रेडिट (₹) |
| 1 | Capital A/c | 2,00,000 | |
| 2 | Cash A/c | 45,000 | |
| 3 | Furniture A/c | 60,000 | |
| 4 | Machinery A/c | 1,20,000 | |
| 5 | Purchases A/c | 1,10,000 | |
| 6 | Sales A/c | 1,85,000 | |
| 7 | Debtors A/c | 40,000 | |
| 8 | Creditors A/c | 35,000 | |
| 9 | Salary A/c | 24,000 | |
| 10 | Rent A/c | 12,000 | |
| 11 | Drawings A/c | 15,000 | |
| 12 | Commission Received A/c | 6,000 | |
| कुल | 4,26,000 | 4,26,000 | |
समझने वाली बातें:
- वेतन और किराया खर्चे हैं, इसलिए डेबिट कॉलम में गए।
- बिक्री और कमीशन प्राप्त आय है, इसलिए क्रेडिट कॉलम में गए।
- आहरण (Drawings) मालिक का निजी निकासी है। यह डेबिट कॉलम में जाता है, खर्चे की तरह।
- देनदार से हमें पैसा लेना है, यानी वह हमारी संपत्ति है, इसलिए डेबिट। लेनदार को हमें पैसा देना है, यानी वह हमारा दायित्व है, इसलिए क्रेडिट।
अगर Trial Balance न मिले तो?
कभी-कभी डेबिट और क्रेडिट का कुल बराबर नहीं आता। इसका मतलब है कि कहीं गलती हुई है। ऐसे में घबराएँ नहीं, ये बातें क्रम से जाँचें:
- दोनों कॉलम का जोड़ दोबारा करें।
- देखें कि कोई खाता छूट तो नहीं गया।
- हर balance सही कॉलम में लिखा है या नहीं।
- Ledger के योग और balance दोबारा जाँचें।
- जर्नल से ledger में posting की जाँच करें, कोई एंट्री एक ही खाते में तो नहीं चढ़ी।
अगर काफ़ी खोजने के बाद भी गलती न मिले, तो अंतर की राशि को अस्थायी रूप से Suspense Account (अनिश्चित खाता) में डाल दिया जाता है। बाद में गलती मिलने पर उसे ठीक करके यह खाता बंद कर दिया जाता है।
गलती खोजने की दो आसान तरकीबें
तरकीब 1: अंतर को 2 से भाग दें। अगर कोई राशि गलत कॉलम में लिख दी जाए, तो अंतर उस राशि का दोगुना आता है। मान लीजिए ऊपर के उदाहरण 1 में Rent ₹5,000 गलती से क्रेडिट कॉलम में लिख दिया। तब डेबिट कुल ₹1,48,000 और क्रेडिट कुल ₹1,58,000 आएगा। अंतर ₹10,000 है, जो ₹5,000 का दोगुना है। अंतर को 2 से भाग देने पर ₹5,000 मिलता है, यानी उसी राशि वाला खाता ढूँढें।
तरकीब 2: अंतर 9 से भाग हो जाए। अगर अंतर 9 से पूरी तरह विभाजित होता है, तो हो सकता है कि किसी राशि के अंक आपस में उलट गए हों। जैसे 45 की जगह 54 लिख दिया हो। इसे Transposition Error कहते हैं।
सही Trial Balance का मतलब क्या है?
यह बात बहुत ज़रूरी है: Trial Balance का मिल जाना इस बात की गारंटी नहीं कि सारे खाते 100% सही हैं। कई गलतियाँ ऐसी होती हैं जिनसे कुल बराबर ही रहता है और वे पकड़ में नहीं आतीं।
| जो गलतियाँ Trial Balance से पकड़ी जाती हैं | जो गलतियाँ पकड़ी नहीं जातीं |
|---|---|
| एंट्री सिर्फ एक खाते में चढ़ाना और दूसरे में भूल जाना खाते का योग या balance गलत निकालना Balance को गलत कॉलम में लिखना डेबिट और क्रेडिट में अलग-अलग राशि चढ़ाना | किसी लेनदेन को जर्नल में लिखना ही भूल जाना गलत खाते में एंट्री करना (जैसे रमेश की जगह सुरेश को डेबिट करना, राशि सही रखकर) गलत सिद्धांत लगाना (जैसे संपत्ति को खर्चा मान लेना) दोनों पक्षों में बराबर की गलत राशि लिखना पूरी एंट्री उलट देना (डेबिट की जगह क्रेडिट) एक गलती की भरपाई दूसरी गलती से हो जाना |
इसलिए Trial Balance को प्राथमिक जाँच समझें। यह बताता है कि गणित सही है, पर यह नहीं कि हर एंट्री सही खाते में हुई है।
Trial Balance से आगे क्या?
Trial Balance मिल जाने के बाद उसी की मदद से अंतिम खाते बनाए जाते हैं: Trading Account (सकल लाभ या हानि), Profit & Loss Account (शुद्ध लाभ या हानि) और Balance Sheet (संपत्ति और दायित्व की स्थिति)। इन पर हम अगले लेखों में बात करेंगे।
विद्यार्थी अक्सर ये गलतियाँ करते हैं
- Drawings को क्रेडिट कॉलम में लिख देना: Drawings हमेशा डेबिट कॉलम में आता है।
- देनदार और लेनदार उलट देना: देनदार डेबिट में, लेनदार क्रेडिट में।
- Purchases और Sales को जोड़ देना: Purchases डेबिट कॉलम में और Sales क्रेडिट कॉलम में जाता है।
- कोई खाता छोड़ देना: सारे ledger के balance लिख लेने के बाद गिनकर देखें।
एक नज़र में मुख्य बातें
- Trial Balance सभी ledger balances की सूची है।
- इसमें डेबिट और क्रेडिट का कुल बराबर आना चाहिए।
- खर्चे, संपत्तियाँ और आहरण डेबिट में जाते हैं, जबकि आय, दायित्व और पूँजी क्रेडिट में।
- यह कोई खाता नहीं, सिर्फ एक विवरण है।
- कुल बराबर आने पर भी कुछ गलतियाँ छिपी रह सकती हैं।
- अंतिम खाते इसी के आधार पर बनते हैं।
निष्कर्ष
Trial Balance लेखांकन की प्रक्रिया का वह पड़ाव है जहाँ हम अपने काम की जाँच करते हैं। जर्नल से ledger और ledger से Trial Balance, ये तीनों कदम एक-दूसरे से जुड़े हैं। इन्हें अच्छी तरह समझ लें तो आगे के अंतिम खाते बनाना काफ़ी आसान हो जाता है। अगले लेख में हम इसी Trial Balance से Trading Account बनाना सीखेंगे। कोई सवाल हो तो कमेंट में ज़रूर पूछें।

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