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World Bank India Poverty Report 2026: भारत में गरीबी, 496 Million लोगों की गरीबी से मुक्ति और प्रमुख चुनौतियाँ



World Bank India Poverty and Equity Brief 2026 – भारत में गरीबी में कमी, प्रमुख आँकड़े और चुनौतियाँ















भारत में गरीबी कम करना लंबे समय से सरकार की प्रमुख विकास प्राथमिकताओं में शामिल रहा है। आर्थिक विकास, रोजगार के अवसरों में वृद्धि और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के विस्तार से पिछले वर्षों में गरीबी के स्तर में उल्लेखनीय कमी आई है। हालांकि, आय में असमानता, बेरोजगारी, कृषि संकट और सामाजिक भेदभाव जैसी समस्याएँ आज भी गरीबी उन्मूलन के रास्ते में बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।

विश्व बैंक की India Poverty and Equity Brief (October 2026) रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2011 से 2023 के बीच भारत में लगभग 496 मिलियन यानी 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए। यह भारत की आर्थिक और सामाजिक प्रगति का महत्वपूर्ण संकेत है। लेकिन गरीबी कम होने के बावजूद इसका लाभ सभी वर्गों और क्षेत्रों तक समान रूप से नहीं पहुँचा है।

1. Why in News? – चर्चा में क्यों?

विश्व बैंक ने अक्टूबर 2026 में India Poverty and Equity Brief जारी की। इस रिपोर्ट में भारत में गरीबी में आई कमी, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच अंतर, आय असमानता तथा सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों का विश्लेषण किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने गरीबी कम करने में उल्लेखनीय प्रगति की है। हालांकि, आर्थिक असमानता, रोजगार की कमी, कृषि क्षेत्र की समस्याएँ और सामाजिक बहिष्करण जैसी चुनौतियाँ इस प्रगति को प्रभावित कर सकती हैं।

2. मुख्य बातें (Key Highlights)

  • 2011 से 2023 के बीच लगभग 496 मिलियन (49.6 करोड़) लोग गरीबी से बाहर आए।
  • $4.20 प्रतिदिन की गरीबी रेखा के आधार पर गरीबी दर 57.7% से घटकर 16.1% हुई।
  • $3.00 प्रतिदिन की सीमा के आधार पर अत्यधिक गरीबी 27.1% से घटकर 2.6% हुई।
  • भारत में शेष गरीबों का लगभग 57% हिस्सा उत्तर प्रदेश से पश्चिम बंगाल तक फैले राज्यों के क्षेत्र में रहता है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी 19.3% और शहरी क्षेत्रों में 8.6% बताई गई है।
  • बच्चों और कम शिक्षित लोगों में गरीबी का स्तर अपेक्षाकृत अधिक है।
  • आय असमानता, कृषि संकट और अनौपचारिक रोजगार गरीबी उन्मूलन की प्रमुख चुनौतियाँ हैं।

3. World Bank Report 2026: गरीबी से जुड़े प्रमुख आँकड़े

सूचकरिपोर्ट में दिया गया आँकड़ा
गरीबी से बाहर आए लोग (2011–2023)496 मिलियन
$4.20 प्रतिदिन गरीबी दर (2011)57.7%
$4.20 प्रतिदिन गरीबी दर (2023)16.1%
$3.00 प्रतिदिन अत्यधिक गरीबी (2011)27.1%
$3.00 प्रतिदिन अत्यधिक गरीबी (2023)2.6%
ग्रामीण गरीबी (2023)19.3%
शहरी गरीबी (2023)8.6%
0–14 वर्ष के बच्चों में गरीबी21.8%
महिलाओं में गरीबी16.6%
शेष गरीबों का क्षेत्रीय हिस्सा (UP से West Bengal)लगभग 57%

4. भारत में गरीबी कम होने के प्रमुख कारण

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में गरीबी में कमी के पीछे कई आर्थिक और सामाजिक कारण रहे हैं। इनमें प्रमुख हैं:

4.1 आर्थिक विकास और घरेलू उपभोग

आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि और घरेलू उपभोग में सुधार से लोगों की आय तथा खर्च करने की क्षमता बढ़ी है। इससे अनेक परिवारों के जीवन स्तर में सुधार हुआ।

4.2 रोजगार के अवसरों में वृद्धि

रोजगार के अवसर बढ़ने से परिवारों की आय में सुधार हुआ। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी ने गरीबी कम करने में योगदान दिया।

4.3 सरकारी कल्याणकारी योजनाएँ

खाद्य सब्सिडी और अन्य सामाजिक सहायता कार्यक्रमों ने कमजोर आय वर्ग के परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने में मदद की।

4.4 सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी सुविधाएँ

शिक्षा, स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और अन्य कल्याणकारी कार्यक्रमों के विस्तार से गरीब परिवारों की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता मिली।

5. भारत में गरीबी की प्रमुख चुनौतियाँ

गरीबी दर में कमी के बावजूद भारत में कई संरचनात्मक समस्याएँ मौजूद हैं। ये समस्याएँ गरीब परिवारों को लंबे समय तक आर्थिक कठिनाइयों में बनाए रख सकती हैं।

5.1 बढ़ती आर्थिक असमानता

आर्थिक विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक समान रूप से नहीं पहुँचता। World Inequality Lab की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की कुल संपत्ति में शीर्ष 1% आबादी की हिस्सेदारी 40% से अधिक बताई गई है। इससे संपत्ति के असमान वितरण की समस्या स्पष्ट होती है।

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 39(c) राज्य को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देता है कि आर्थिक व्यवस्था के संचालन से धन और उत्पादन के साधनों का संकेंद्रण आम जनता के हितों के विरुद्ध न हो।

5.2 अनौपचारिक रोजगार और Gig Economy

भारत के श्रम बाजार में बड़ी संख्या में लोग अनौपचारिक क्षेत्र में काम करते हैं। ऐसे श्रमिकों को नियमित वेतन, नौकरी की स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा का लाभ सीमित रूप से मिलता है।

Gig Workers और Platform Workers के सामने भी स्वास्थ्य सुरक्षा, पेंशन तथा रोजगार की अनिश्चितता जैसी चुनौतियाँ हैं। किसी बीमारी या आर्थिक संकट के कारण उनकी आय प्रभावित हो सकती है।

5.3 बेरोजगारी और Jobless Growth

जब अर्थव्यवस्था में उत्पादन तो बढ़ता है, लेकिन उसी अनुपात में रोजगार के अवसर नहीं बढ़ते, तो इसे Jobless Growth कहा जाता है। पूँजी-प्रधान विकास के कारण श्रम-प्रधान क्षेत्रों में पर्याप्त रोजगार पैदा नहीं हो पाता।

International Labour Organization (ILO) की India Employment Report 2024 के अनुसार, भारत के बेरोजगार लोगों में युवाओं की हिस्सेदारी लगभग 83% थी। यह युवा रोजगार की गंभीर चुनौती को दर्शाता है।

5.4 कृषि संकट और किसानों की आय

भारत की बड़ी आबादी आज भी कृषि पर निर्भर है। छोटी और बिखरी हुई जोत, मानसून पर निर्भरता, उत्पादन लागत और बाजार में कीमतों का उतार-चढ़ाव किसानों की आय को प्रभावित करते हैं।

कृषि क्षेत्र में छिपी बेरोजगारी (Disguised Unemployment) भी एक बड़ी समस्या है। कई बार किसी काम में आवश्यकता से अधिक लोग लगे होते हैं, लेकिन अतिरिक्त श्रमिकों का उत्पादन में योगदान बहुत कम होता है।

5.5 जातिगत और सामाजिक भेदभाव

अनुसूचित जातियों (SCs), अनुसूचित जनजातियों (STs) तथा अन्य वंचित समुदायों को ऐतिहासिक भेदभाव, भूमि से वंचित होने और सीमित आर्थिक अवसरों जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

सामाजिक बहिष्करण के कारण इन समुदायों के लिए शिक्षा, रोजगार, संपत्ति और आर्थिक संसाधनों तक समान पहुँच बनाना कठिन हो सकता है।

5.6 महिलाओं में गरीबी और अवैतनिक कार्य

महिलाएँ घरेलू कार्य, बच्चों की देखभाल और परिवार के अन्य कामों में काफी समय देती हैं। इन कार्यों का बड़ा हिस्सा अवैतनिक होता है। इसके कारण महिलाओं की नियमित रोजगार और आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी प्रभावित होती है।

महिलाओं को बेहतर शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण, सुरक्षित रोजगार और आर्थिक निर्णयों में भागीदारी देना गरीबी कम करने के लिए आवश्यक है।

5.7 कुपोषण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ

गरीबी का प्रभाव केवल आय तक सीमित नहीं है। कुपोषण, एनीमिया और बच्चों में कम शारीरिक विकास जैसी समस्याएँ शिक्षा तथा भविष्य की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती हैं।

इसके अतिरिक्त, इलाज पर परिवारों का अपनी जेब से होने वाला खर्च (Out-of-Pocket Expenditure) कई गरीब परिवारों को कर्ज और आर्थिक संकट में डाल सकता है।

5.8 जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाएँ

बाढ़, सूखा, गर्मी की लहर और अन्य जलवायु संबंधी आपदाएँ गरीब परिवारों को अधिक प्रभावित करती हैं। इन घटनाओं से फसल, पशुधन, मकान और आजीविका को नुकसान पहुँच सकता है।

छोटे किसानों और शहरी झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले परिवारों के पास ऐसे नुकसान से उबरने के लिए सीमित आर्थिक संसाधन होते हैं।

5.9 शिक्षा और स्वास्थ्य पर कम निवेश

शिक्षा और स्वास्थ्य में पर्याप्त सार्वजनिक निवेश नहीं होने से मानव पूँजी का विकास प्रभावित होता है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण की कमी के कारण युवा कम आय वाले और असुरक्षित रोजगार में फँस सकते हैं।

5.10 महँगाई और बुजुर्गों की आर्थिक सुरक्षा

खाद्य पदार्थों की कीमतों में लगातार वृद्धि से कम आय वाले परिवारों की क्रय शक्ति घटती है। वहीं, पर्याप्त पेंशन और सामाजिक सुरक्षा नहीं होने पर बुजुर्गों की देखभाल का आर्थिक भार परिवार के युवा सदस्यों पर पड़ सकता है।

6. भारत में गरीबी की अवधारणा (What is Poverty?)

गरीबी ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति या परिवार अपनी बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन प्राप्त नहीं कर पाता। इन आवश्यकताओं में भोजन, आवास, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और सम्मानजनक जीवन शामिल हैं।

गरीबी केवल कम आय की समस्या नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति की क्षमताओं, अवसरों, सामाजिक भागीदारी और जीवन की गुणवत्ता को भी प्रभावित करती है।

6.1 गरीबी के प्रमुख प्रकार

1. Absolute Poverty (निरपेक्ष गरीबी): ऐसी स्थिति जिसमें व्यक्ति न्यूनतम आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आवश्यक आय या संसाधन नहीं जुटा पाता।

2. Relative Poverty (सापेक्ष गरीबी): ऐसी स्थिति जिसमें व्यक्ति की आय या जीवन स्तर समाज के औसत अथवा मध्य आय स्तर की तुलना में काफी कम होता है।

3. Multidimensional Poverty (बहुआयामी गरीबी): ऐसी गरीबी जिसमें आय के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, आवास और बुनियादी सुविधाओं की कमी को भी शामिल किया जाता है।

6.2 गरीबी का मापन कैसे किया जाता है?

गरीबी का मापन मुख्य रूप से निम्नलिखित तरीकों से किया जाता है:

  • Monetary Measurement: आय या उपभोग व्यय के आधार पर गरीबी का आकलन।
  • Non-Monetary Measurement: शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, आवास और बुनियादी सुविधाओं के आधार पर गरीबी का आकलन।
  • Subjective Measurement: लोगों के अपने जीवन स्तर और आर्थिक स्थिति के अनुभवों के आधार पर गरीबी का आकलन।

मौद्रिक गरीबी के आकलन में सामान्यतः गरीबी रेखा निर्धारित की जाती है, आय या उपभोग का आँकड़ा चुना जाता है और फिर यह देखा जाता है कि कितनी आबादी उस सीमा से नीचे है।

7. भारत में गरीबी आकलन का इतिहास और प्रमुख समितियाँ

स्वतंत्रता के बाद भारत में गरीबी मापने की पद्धति को विकसित करने के लिए कई समितियों का गठन किया गया। इन समितियों ने गरीबी रेखा और उपभोग व्यय के आकलन से संबंधित सुझाव दिए।

समितिवर्षमुख्य योगदान
Alagh Committee1979कैलोरी आवश्यकताओं और उपभोग व्यय के आधार पर गरीबी रेखा का आकलन।
Lakdawala Committee1993राज्य-विशिष्ट मूल्य सूचकांकों के आधार पर गरीबी आकलन की पद्धति को आगे बढ़ाया।
Tendulkar Committee2009कैलोरी आधारित पद्धति से आगे बढ़कर स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य आवश्यक खर्चों को शामिल किया।
Rangarajan Committee2014ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए अलग-अलग उपभोग टोकरी के आधार पर गरीबी रेखा का सुझाव दिया।

7.1 Tendulkar Committee (2009)

इस समिति ने गरीबी मापन में केवल कैलोरी आवश्यकता पर निर्भर रहने के बजाय शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक खर्चों को भी ध्यान में रखने की सिफारिश की।

इसने 2011–12 के लिए प्रति व्यक्ति मासिक गरीबी रेखा ग्रामीण क्षेत्रों में ₹816 और शहरी क्षेत्रों में ₹1,000 निर्धारित की थी।

7.2 Rangarajan Committee (2014)

इस समिति ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए अलग-अलग उपभोग टोकरी के आधार पर गरीबी रेखा निर्धारित करने का सुझाव दिया था। इसके अनुसार 2011–12 के लिए गरीबी रेखा ग्रामीण क्षेत्रों में ₹972 और शहरी क्षेत्रों में ₹1,407 प्रति व्यक्ति प्रति माह थी।

ध्यान दें कि Rangarajan Committee की सिफारिशों को सरकार ने आधिकारिक रूप से अपनाया नहीं था।

8. गरीबी उन्मूलन के लिए EMPOWER Framework

भारत में गरीबी को स्थायी रूप से कम करने के लिए केवल आर्थिक सहायता पर्याप्त नहीं है। रोजगार, सामाजिक सशक्तिकरण, कृषि सुधार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा को एक साथ मजबूत करना आवश्यक है। इसके लिए रिपोर्ट में EMPOWER Framework का सुझाव दिया गया है।

E – Employment (रोजगार)

  • युवाओं के लिए कौशल विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाना।
  • Textile, Food Processing और अन्य श्रम-प्रधान क्षेत्रों में रोजगार को प्रोत्साहन देना।
  • Apprenticeship और औपचारिक रोजगार को बढ़ावा देना।
  • PM Kaushal Vikas Yojana जैसी कौशल विकास पहलों को मजबूत करना।

M – Marginalized Empowerment (वंचित वर्गों का सशक्तिकरण)

  • महिलाओं और वंचित समुदायों को आर्थिक अवसर उपलब्ध कराना।
  • Self Help Groups (SHGs) को डिजिटल बाजारों से जोड़ना।
  • महिलाओं के उत्पादों को ONDC जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से बाजार उपलब्ध कराना।
  • दिव्यांग व्यक्तियों के लिए रोजगार और सुलभ सुविधाओं को बढ़ावा देना।

P – Progressive Taxation (प्रगतिशील कर व्यवस्था)

  • कर व्यवस्था को अधिक न्यायसंगत बनाने पर विचार करना।
  • धन के अत्यधिक संकेंद्रण को कम करने के उपाय करना।
  • स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सार्वजनिक सेवाओं में निवेश बढ़ाना।
  • संविधान के अनुच्छेद 39(c) के उद्देश्य के अनुरूप आर्थिक न्याय को बढ़ावा देना।

O – Overhauling Agriculture (कृषि सुधार)

  • किसानों को सस्ती और आसान ऋण सुविधा उपलब्ध कराना।
  • Kisan Credit Card (KCC) और डिजिटल कृषि सेवाओं का विस्तार करना।
  • छोटे किसानों को बाजार और तकनीक से जोड़ना।
  • मोटे अनाज (Shree Anna) और दालों जैसी फसलों को प्रोत्साहित करना।
  • जलवायु परिवर्तन के जोखिमों से किसानों की सुरक्षा करना।

W – Welfare (सामाजिक सुरक्षा)

  • असंगठित और Gig Workers के लिए सामाजिक सुरक्षा मजबूत करना।
  • स्वास्थ्य बीमा, पेंशन और अन्य सहायता कार्यक्रमों का विस्तार करना।
  • बुजुर्गों के लिए स्थानीय स्तर पर देखभाल सुविधाएँ विकसित करना।
  • कमजोर परिवारों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाना।

E – Education & Health (शिक्षा और स्वास्थ्य)

  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समान पहुँच सुनिश्चित करना।
  • व्यावसायिक और कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना।
  • पोषण, एनीमिया और बच्चों में कुपोषण की समस्या पर ध्यान देना।
  • सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश बढ़ाना।

R – Resilience (आपदा और आर्थिक संकट से सुरक्षा)

  • किसानों के लिए मौसम आधारित बीमा और जोखिम सुरक्षा को मजबूत करना।
  • बाढ़, सूखा और गर्मी जैसी आपदाओं से प्रभावित परिवारों को सहायता देना।
  • जलवायु परिवर्तन से प्रभावित श्रमिकों के लिए कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराना।
  • गरीब परिवारों की आजीविका और संपत्ति की सुरक्षा करना।

9. गरीबी उन्मूलन से जुड़े महत्वपूर्ण सरकारी कार्यक्रम

भारत में गरीबी कम करने के लिए रोजगार, खाद्य सुरक्षा, कौशल विकास, वित्तीय समावेशन और सामाजिक सुरक्षा से संबंधित कई योजनाएँ और कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं। इनमें प्रमुख हैं:

  • PM Kaushal Vikas Yojana: युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार के लिए तैयार करना।
  • Public Distribution System (PDS): पात्र परिवारों को खाद्यान्न उपलब्ध कराकर खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना।
  • Kisan Credit Card: किसानों को कृषि और संबंधित गतिविधियों के लिए ऋण सुविधा देना।
  • Self Help Groups: महिलाओं और ग्रामीण परिवारों को बचत, ऋण और आजीविका के अवसरों से जोड़ना।
  • National Education Policy 2020: शिक्षा और कौशल विकास को बेहतर बनाने के लिए नीतिगत ढाँचा प्रदान करना।
  • Code on Social Security, 2020: सामाजिक सुरक्षा से संबंधित कानूनी ढाँचे को मजबूत करना।

10. गरीबी और सतत विकास लक्ष्य (SDGs)

गरीबी उन्मूलन संयुक्त राष्ट्र के Sustainable Development Goals (SDGs) का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। गरीबी कम करने के लिए निम्नलिखित लक्ष्य विशेष रूप से प्रासंगिक हैं:

  • SDG 1 – No Poverty: सभी प्रकार की गरीबी को समाप्त करना।
  • SDG 8 – Decent Work and Economic Growth: सम्मानजनक रोजगार और सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा देना।
  • SDG 10 – Reduced Inequalities: देशों के भीतर और देशों के बीच असमानता कम करना।

11. Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1. World Bank की India Poverty and Equity Brief October 2026 में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य क्या है?

रिपोर्ट के अनुसार, 2011 से 2023 के बीच भारत में लगभग 496 मिलियन यानी 49.6 करोड़ लोग $4.20 प्रतिदिन की गरीबी सीमा के आधार पर गरीबी से बाहर आए।

Q2. भारत में $4.20 प्रतिदिन की गरीबी दर कितनी कम हुई?

रिपोर्ट के अनुसार, यह दर 2011 में 57.7% थी, जो 2023 में घटकर 16.1% रह गई।

Q3. Absolute Poverty और Relative Poverty में क्या अंतर है?

Absolute Poverty में व्यक्ति न्यूनतम बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थ होता है। Relative Poverty में व्यक्ति की आय या जीवन स्तर समाज के औसत या मध्य स्तर की तुलना में कम होता है।

Q4. भारत में गरीबी आकलन से संबंधित प्रमुख समितियाँ कौन-सी हैं?

प्रमुख समितियों में Alagh Committee (1979), Lakdawala Committee (1993), Tendulkar Committee (2009) और Rangarajan Committee (2014) शामिल हैं।

Q5. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 39(c) किससे संबंधित है?

अनुच्छेद 39(c) राज्य को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देता है कि आर्थिक व्यवस्था के संचालन से धन और उत्पादन के साधनों का संकेंद्रण आम जनता के हितों के विरुद्ध न हो।

Q6. Multidimensional Poverty Index (MPI) क्या मापता है?

MPI गरीबी को केवल आय के आधार पर नहीं मापता, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन स्तर से संबंधित अभावों को भी शामिल करता है।

Q7. EMPOWER Framework का उद्देश्य क्या है?

इसका उद्देश्य रोजगार, वंचित वर्गों का सशक्तिकरण, प्रगतिशील कर व्यवस्था, कृषि सुधार, सामाजिक कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक लचीलापन मजबूत करके गरीबी कम करना है।

12. Exam Preparation: महत्वपूर्ण तथ्य

  • रिपोर्ट: India Poverty and Equity Brief
  • जारी करने वाली संस्था: World Bank
  • रिपोर्ट का संस्करण: October 2026
  • 2011–2023 में गरीबी से बाहर आए लोग: 496 मिलियन
  • गरीबी मापन की $4.20 प्रतिदिन सीमा पर दर: 57.7% से 16.1%
  • अत्यधिक गरीबी की $3.00 प्रतिदिन सीमा पर दर: 27.1% से 2.6%
  • गरीबी आकलन की प्रमुख समितियाँ: Alagh, Lakdawala, Tendulkar और Rangarajan
  • संविधान का संबंधित प्रावधान: अनुच्छेद 39(c)
  • प्रमुख वैश्विक लक्ष्य: SDG 1, SDG 8 और SDG 10

निष्कर्ष

World Bank की India Poverty and Equity Brief 2026 भारत में गरीबी कम करने की दिशा में हुई उल्लेखनीय प्रगति को सामने रखती है। 2011 से 2023 के बीच लगभग 49.6 करोड़ लोगों का गरीबी से बाहर आना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

हालांकि, केवल गरीबी दर में कमी को गरीबी उन्मूलन नहीं माना जा सकता। आय असमानता, बेरोजगारी, कृषि संकट, सामाजिक भेदभाव, कुपोषण और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों पर भी ध्यान देना जरूरी है।

भारत में स्थायी गरीबी उन्मूलन के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने, महिलाओं तथा वंचित वर्गों को सशक्त बनाने और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की आवश्यकता है। समावेशी विकास के माध्यम से ही Antyodaya से Sarvodaya की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।

स्रोत (Sources)

नोट: इस लेख में अक्टूबर 2026 की उपलब्ध कराई गई रिपोर्ट-सामग्री के आँकड़ों और दावों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है। परीक्षा या शोध के लिए मूल World Bank रिपोर्ट से नवीनतम आँकड़ों और परिभाषाओं का मिलान अवश्य करें।





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